स्किन व्हाइटनिंग

चेहरे पर उम्र स्थलों में से क्रीम
चेहरे पर उम्र के धब्बे से छुटकारा पाने के लिए कैसे

हर उम्र की महिलाएं गर्मी का मौसम शुरू होते ही अपनी त्वचा के गोरेपन को लेकर चिंतित हो जाती है। कुछ महिलाएँ मार्च और अप्रैल के महीनों में उभरने वाले चकत्तों को लेकर चिंतित रहती हैं, कुछ महिलाएँ बड़े एफ़ेलिनिड्स साँवले धब्बों तो कुछ क्लोआज़्मा के धब्बों से परेशान रहती हैं। तीसरे टाइप की महिलाएँ लेंटिगो (झाईं), लिवर स्पॉट्स (उम्र बढ़ने पर होने वाले दाग) और दूसरे प्रकार के त्वचा के धब्बों से परेशान रहती हैं जो काफी भद्दे दिखते हैं। चूंकि इस लेख में ब्लीचिंग क्रीम्स के बारे में बताया गया है इसलिए हम अपनी पाठिकाओं को सावधान करना चाहेंगे कि त्वचा के हर दोष को ब्लीच नहीं किया जाना चाहिए। सबसे पहले तो आपको अपने चेहरे के साँवले धब्बों के कारण का पता लगाना जरूरी होता है – पहले समस्या पता करें और फिर निर्णय लें कि ब्लीचिंग शुरू करना है या नहीं। हर केस में ब्लीचिंग की जरूरत नहीं होती क्योंकि कई बार शरीर की अंदरूनी गड़बड़ियों के कारण भी दाग-धब्बे आ जाते हैं। ऐसा करने से यह फायदा होता है कि एक बार समस्या का कारण पता लग जाए और फिर उसका इलाज किया जाए तो नतीजे अच्छे आते हैं। इसलिए उदाहरण के लिए कई बार यदि आप अपनी बीमार आंत का इलाज कर लेंगी – तो स्किन का रंग अच्छा हो जाएगा। और यदि आप अपनी पाचनांत्र ग्रहणी (ड्यूओडिनम) को ठीक कर लेंगी – तो आपकी कील-मुँहासे गायब हो जाएंगे। इसलिए स्किन की समस्याओं में आपको पहले समस्या की जड़ तक जाने की जरूरत होती है और इसके बाद ही आप इसका इलाज शुरू कर सकती हैं।

और यदि समस्या चकत्तों की हो तो इनसे लगातार लड़ते रहने इनकी रोकथाम ही सबसे बेहतर होती है। आपको एस्कोर्बिक एसिड और निकोटिनीक एसिड, डॉग रोज़ (एक प्रकार का जंगली गुलाब) की चाय और और विटामिन सी वाले खाने ज़्यादा लेना चाहिए।

और मार्च-अप्रैल में आप ब्लीचिंग क्रीम लगाना शुरू कर सकती हैं। लेकिन आपको पहले उन पदार्थों के बारे में जानना होगा जो आपकी स्किन को गोरा बनाते हैं।

त्वचा की ब्लीचिंग करने के आधुनिक तरीके। कौन सी चीजें त्वचा को गोरा करती हैं

आधुनिक नारी के लिए कौन से फेशियल ब्लीचिंग टूल्स उपलब्ध हैं? हमने इनकी एक लिस्ट बनाई है:

  • हाइड्रोक्विनोन। यह पदार्थ काफी जहरीला होता है और इसमें गोरा करने के अत्यधिक प्रभावशील गुण होते हैं। यह उन कोशिकाओं को काम करने के रोकता है जो मेलानिन उत्पादन करती हैं और इसी कारण चकत्ते बनते ही नहीं। इसे सावधानी से और कम मात्रा में लगाना चाहिए नहीं तो इसका उल्टा असर भी हो सकता है और त्वचा और काली भी हो सकती है। इसे गर्भवती और दूध पिला रही माँएं भी नहीं ले सकतीं क्योंकि हाइड्रोक्विनोन स्किन के अंदर खून तक चला जाता है।

 

  • हाइड्रोक्विनोन की तुलना में आर्ब्यूटिन का असर थोड़ा कम होता है लेकिन यह कम जहरीला भी होता है। यह बेयरबेरी में पाया जाता है। यह भी मेलानिन उत्पादन करने वाली कोशिकाओं पर असर करता है और चकत्ते बनने ही नहीं देता।
  • कोजिक एसिड एक प्रोफेशनल व्हाइटनिंग प्रोडक्ट है। यह आर्ब्यूटिन की तरह ही काम करता है बस अंतर इतना है कि यह एसिड एक बढ़िया एंटीऑक्सीडेंट और एक अच्छा एक्सफोलिएटर भी है। यह जहरीला नहीं होता लेकिन ज़्यादा संवेदनशील लोगों को इससे एलर्जी हो सकती है।
  • एस्कोर्बिक एसिड भी कोजिक एसिड की तरह ही होता है बस एक सावधानी बरतनी होती है – इससे कभी-कभी त्वचा में जलन हो सकती है।
  • अल्फ़ा हायड्रोक्सी एसिड काफी अच्छे से एक्सफोलिएट होते हैं और इसलिए इसे स्किन की ऊपर की साँवली पड़ चुकी परत को हटाने में उपयोग किया जाता है।
  • आम तौर पर ब्लीचिंग क्रीमें एक्सफोलिएटिंग, ब्लीचिंग करने, दाह से लड़ने और धूप से बचने वाले पदार्थों से मिलाकर बनाई जाती हैं।

 

स्किन ब्लीचिंग करने के घरेलू नुस्खे

उम्र के धब्बे को हटाने
उम्र के धब्बे से क्रीम चेहरे सफेद

घरेलू नुस्खों को पसंद करने वाले लोग घर पर उपलब्ध कई ऐसी चीजें लगा सकते हैं जिनमें ब्लीचिंग के गुण होते हैं। ये केमिकल्स जैसी असरदार नहीं होती और इसलिए इन्हें लंबे समय तक इस्तेमाल करना पड़ता है:

 

  • बेयरबेरी में हाइड्रोक्विनोन और ऑर्गैनिक एसिड लघु मात्रा में पाए जाते हैं।

 

  • सहस्त्रपर्णी (यैरो) में फ्लावानोइड्स होते हैं जो ऐसे पदार्थ बनाते हैं जिनसे कोशिकाएँ मेलानिन का उत्पादन रोक देती हैं।
  • मुलैठी (लीकोरिस) में ऑर्गैनिक और फीनोलिक एसिड होते हैं जिनसे त्वचा गोरी होती है।
  • नींबू और ककड़ी में ऑर्गैनिक एसिड और एस्कोर्बिक एसिड होते हैं और इसलिए इन्हें शरीर के अंदर और बाहर दोनों जगह इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • पार्सली में ऐसे तेल होते हैं जो त्वचा को गोरा करते हैं।

त्वचा को गोरा करने के प्रोफेशनल तरीके में स्पेशल पीलिंग, दूध, टॉनिक्स, फेस मास्क और स्टोर पर बिकने वाली क्रीमों का फायदा उठाया जाता है। यदि समस्या को किसी ब्यूटी पार्लर में सुलझाना हो तो किसी कॉस्मेटीशियन के मार्गदर्शन में सारी प्रक्रिया सिस्टम से होनी चाहिए। मॉडर्न ब्लीचिंग टूल्स सिर्फ केमिकल्स पर आधारित नहीं होते, इन्हें नैचुरल प्रोडक्ट्स से भी बनाया जाता है। उदाहरण के लिए ब्लीचिंग टूल्स बनाने वाले रूसी उत्पादों में औषधियों से मिलने वाले ऐसे पदार्थ होते हैं जो मृत कोशिकाओं को हटाते हैं और मेलानिन का संश्लेषण भी रोकते हैं। व्हाइटनिंग लाइन में, एक नियम के तौर पर, पीलिंग, मास्क, दूध, टॉनिक और डे और नाइट क्रीम और व्हे शामिल होते ही हैं। इस लाइन से आप 5-8 हफ्तों तक जटिल ब्लीचिंग भी कर सकती हैं।

चेहरे की स्किन को गोरा करने के लिए क्रीमें

स्किन की ब्लीचिंग के लिए आप नीचे दी हुई क्रीमें ले सकती हैं:

  • मर्करी (पारे) वाली क्रीम। बेहद असरदार, लेकिन इसे बहुत सावधानी से इस्तेमाल करना चाहिए। कोर्स शुरू करने के पहले आपको स्किन का सेंसिटिविटी टेस्ट कर लेना चाहिए। गर्भवती या दूध पीला रही माँएं इसे नहीं ले सकतीं। इसके निर्देश सावधानी से पढ़ें!
  • दूध या कोजिक एसिड वाली क्रीम। यह एक काफी एक्टिव क्रीम होती है जो मेलानिन जमने से रोकती है और इससे त्वचा ठीक होती है।
  • सैलिसाइक्लिक अल्कोहल। इसे ऑइली और नॉर्मल स्किन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। नॉर्मल स्किन पर अल्कोहल लगाने के पहले उसे लोशन से पोंछ लेना चाहिए और ऑइली स्किन को साबुन से धोना चाहिए। अल्कोहल से ब्लीचिंग के 3-4 दिन के कोर्स के बाद इसकी जगह केफिर लेना शुरू कर दें और फिर से सैलिसाइक्लिक एल्कोहल लगाएँ। यदि स्किन में जलन होने लगे तो पानी से न धोएँ। अल्कोहल को सूरजमुखी के तेल से धोना बेहतर होता है और इसके बाद चेहरे पर आलू का या चावल का आटा लगाना चाहिए।
  • होम व्हाइटनिंग क्रीम। हमें 15 ग्राम लैनोलीन लेकर उसमें 50 ग्राम स्टोन ऑइल डालना है और फिर एक चम्मच पीसी हुई ताजी ककड़ी मिलानी है। इस मिक्सचर को फॉइल से ढँक दें और एक घंटे तक उबलते पानी में रखें। इसके बाद इसे अच्छी तरह से हिला कर फिल्टर करें और झड़ाएँ।

 

लगाने का तरीका: सोने जाने के दो घंटे पहले क्रीम को दाग वाली जगहों पर लगाएँ और बाकी जगह की क्रीम को एक नैपकिन से पोंछ दें। इसे एक हफ्ते तक लगाएँ और फिर 2-3 दिन न लगाएँ।

व्हाइटनिंग क्रीम कैसे इस्तेमाल करनी चाहिए

ब्लीचिंग क्रीमों को सुबह लगाने की सलाह दी जाती है, और पोषण देने वाली न्यूट्रिशन क्रीमों को शाम को लगाना चाहिए। सुबह चेहरे को एक गीली नैपकिन से ताजा करना चाहिए और नारिशिंग क्रीम को आँखों की पलकों और आँखों के नीचे लगाना चाहिए।

और हमेशा याद रखें कि स्किन की समस्याओं से बचने के लिए उनकी रोकथाम की सबसे बढ़िया तरीका होता है।

उपचार का सबसे अच्छा तरीका

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